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पंजाब विधानसभा की मर्यादा फिर हुई तार-तार, सत्ता पक्ष और विपक्ष में खूब तू-तू, मैं-मैं हुई (दैनिक जागरण)

किसी भी राज्य की विधानसभा व सदन की गरिमा होती है। वहां पर जनप्रतिनिधि जनहित के मसलों को सुलझाते हैं, उन पर चर्चा करते हैं। मुद्दों पर कई बार बहस भी होती है। बहस का मतलब यहां पर गालीगलौज नहीं होता बल्कि मर्यादित भाषा में एक दूसरे के सवालों का जवाब देना होता है। लेकिन पंजाब विधानसभा में अब तो लगभग हर बार सत्र के दौरान सदन की मर्यादाएं तार-तार होती जा रही हैं जोकि अत्यंत चिंता का विषय है। सरेआम गालीगलौज, धमकियां इत्यादि आम हो गया है। इससे भी ऊपर हमारे सदन में ऐसे महानुभाव भी हैं जो अंदर की गोपनीय बातों का वीडियो बनाकर वायरल कर रहे हैं। लोगों को अंदर की हकीकत बता रहे हैं कि लोकतंत्र के मंदिर में जनहित के मुद्दों पर बात नहीं होती बल्कि वहां पर उनका ऐसा आचरण होता है। यह पहली बार नहीं हुआ है। इससे पूर्व जब राज्य में शिरोमणि अकाली दल और भारतीय जनता पार्टी की सरकार सत्ता पर काबिज थी उस वक्त भी सदन में कई बार ऐसी स्थिति उत्पन्न हुई।

सत्ता पक्ष और विपक्ष में खूब तू-तू, मैं-मैं हुई, गालियां तक दी गईं। वीरवार को भी बजट सत्र के दौरान सत्ताधारी दल के एक मंत्री और विपक्षी दल के पूर्व मंत्री लंगर पर जीएसटी की माफी को लेकर आपस में उलझ गए और आधा घंटा तक असंसदीय भाषा का इस्तेमाल करते हुए एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाते रहे। इसी बीच एक विधायक ने सदन की गोपनीयता को भंग करते हुए सारे घटनाक्रम का वीडियो बनाकर वायरल कर दिया। हालांकि इस सारे प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए सूबे के मुख्यमंत्री की मांग पर विधानसभा के अध्यक्ष ने तुरंत प्रभाव से जांच के आदेश दे दिए हैं परंतु यहां पर सवाल यह उठता है कि आखिर सदन में ऐसी अमर्यादित घटनाओं पर अंकुश क्यों नहीं लगता? क्यों ऐसे नेताओं पर अध्यक्ष द्वारा कोई ठोस कार्यवाही नहीं की जाती ताकि सदन की गरिमा कायम रहे? पंजाब के सामने अभी कई ज्वलंत समस्याएं व मुद्दे हैं जिन पर सभी सदस्यों को आपसी विमर्श कर उनका हल निकालना चाहिए। सार्थक व स्वस्थ बहस होनी चाहिए।

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