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प्रदूषण के विरुद्ध (नवभारत टाइम्स)

दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार ने वर्ष 2018-19 के अपने बजट को ‘ग्रीन बजट’ का रूप देकर जो नई पहलकदमी की है, उसका स्वागत किया जाना चाहिए। पहली बार भारत की किसी सरकार ने प्रदूषण की जानलेवा समस्या पर अपनी शक्ति भर पैसा लगाया है। यह इस बात का संकेत है कि केजरीवाल सरकार प्रदूषण को बात-बहादुरी तक सीमित रखने के बजाय इसे एक बड़ी सामाजिक-आर्थिक चुनौती मानती है और इससे ठोस तरीके से निपटना चाहती है। दिल्ली का प्रदूषण विश्वव्यापी चिंता का विषय बन चला है। बीते दिसंबर में दिल्ली की हवा में पीएम 2.5 की मात्रा 320.9 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर दर्ज की गई, जो आपात स्थिति के मानक से भी कुछ ऊपर थी। इसी तरह पीएम 10 की मात्रा 496 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर दर्ज की गई, जो आपात स्थिति के करीब है। कई अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ यहां तक कह चुके हैं कि दिल्ली रहने लायक शहर नहीं रह गया है। जाहिर है, दिल्ली की जिम्मेदारी संभाल रही सरकार का यह सबसे बड़ा फर्ज है कि वह प्रदूषण पर काबू करके इस शहर को रहने लायक बनाए।

इसी को ध्यान में रखकर ग्रीन बजट में दिल्ली सरकार के चार विभागों पर्यावरण, ट्रांसपोर्ट, पावर और पीडब्ल्यूडी से जुड़ी 26 योजनाओं को शामिल किया गया है और इनके जरिए प्रदूषण नियंत्रण का अभियान शुरू किया जा रहा है। सरकार ने प्रस्ताव किया है कि जो लोग सीएनजी फिटेड कार खरीदेंगे उन्हें रजिस्ट्रेशन चार्ज में 50 पर्सेंट की छूट मिलेगी। दिल्ली के रेस्टोरेंट्स अगर कोयले वाले तंदूर की जगह इलेक्ट्रिक या गैस तंदूर काम में लाते हैं तो सरकार उन्हें प्रति तंदूर 5 हजार रुपये तक की सब्सिडी देगी। 10 केवीए या इससे अधिक क्षमता के डीजल जेनरेटर की जगह इलेक्ट्रिक जेनरेटर का इस्तेमाल करने पर सरकार की तरफ से इसके लिए 30 हजार रुपये तक की सब्सिडी दी जाएगी। इंडस्ट्रियल एरिया में पाइप्ड नैचरल गैस का इस्तेमाल करने पर एक लाख रुपये तक की मदद सरकार की ओर से मिलेगी। दिल्ली देश का पहला ऐसा राज्य बनने जा रहा है, जहां जनवरी से लेकर दिसंबर तक पूरे साल प्रदूषण का रीयल टाइम डेटा जुटाया जाएगा। सरकार ने एक हजार लो फ्लोर इलेक्ट्रिक बसें लाने का लक्ष्य भी रखा है। शहर में हरित इलाके बढ़ाए जाएंगे। इलेक्ट्रिक वीइकल पॉलिसी भी बनाई जा रही है। बहरहाल, दिल्ली सरकार की अपनी कुछ सीमाएं भी हैं। उसकी कई परियोजनाएं उप-राज्यपाल की मंजूरी पर निर्भर करेंगी। बावजूद इसके, उसने प्रदूषण से लड़ने की जो इच्छाशक्ति दिखाई है, वह बाकी सरकारों के लिए एक मिसाल है। दिल्ली सरकार को अपनी इन योजनाओं पर अमल में दृढ़ता दिखानी होगी, हालांकि शहरवासियों के सहयोग से इसे एक आंदोलन का रूप भी दिया जा सकता है।

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