संपादकीय:Editorials (English & Hindi) Daily Updated

होगा ईरान पर अमरीकी हमला? (पत्रिका)

अमरीका, मध्य-पूर्व में जो क्षेत्रीय व्यवस्था कायम करना चाहता है, उससे ईरान को बाहर रहने दो और उसके विषदंत निकाल लो।

– सईद नकवी, वरिष्ठ पत्रकार

न्यूयॉर्क टाइम्स के संपादकीय पेज के सामने वाले पेज की हेडलाइन ने सब कुछ खोल दिया। ‘मैंने युद्ध के झूठे विकल्प को स्वीकार्य बनाने में एक बार मदद की थी। अब फिर वही हो रहा है।’ कर्नल लॉरेंस विल्करसन का कॉलम गत 5 फरवरी को प्रकाशित हुआ। यह तारीख इसलिए अहम है कि ठीक पंद्रह साल पहले, 5 फरवरी 2003 को, सेक्रेटरी ऑफ स्टेट रहे कॉलिन पॉवेल ने संयुक्त राष्ट्र में इराक से निवारक युद्ध शुरू करने की दलील दी थी। सेटेलाइट से खींची हुई उन डरावनी तस्वीरों को याद कीजिए, जिनमें गाडिय़ों के कूच करने के दृश्य थे, जिससे ‘पुष्ट’ होता था कि इस अभिशप्त देश में ‘जन विनाश के हथियार’ मौजूद हैं।

पॉवेल के चीफ ऑफ स्टाफ रहे लॉरेंस विल्करसन ने इस भाषण को तैयार करने में मदद की थी। अब उनका हृदय परिवर्तन हो चुका है। उन्होंने आग से गुजर कर सीखा कि उन्हें और उनके बॉस को गुप्तचर बिरादरी ने मूर्खतापूर्ण कारगुजारी की ओर धकेला था। इराक में ‘जन विनाश के हथियार’ थे ही नहीं। इसके बाद विल्करसन, वाशिंगटन के मौजूदा मूड से तुलना करते हैं, ‘एक महीना पहले, राष्ट्र संघ में अमरीका की राजदूत निक्की हेली ने कहा कि हमारे पास अकाट्य सबूत हैं कि ईरान बैलिस्टिक मिसाइलों और यमन के बारे में सुरक्षा परिषद द्वारा पारित प्रस्तावों का पालन नहीं कर रहा। निक्की ने सेटेलाइट से ली गई तस्वीरें भी दिखाईं जो सिर्फ अमरीका के पास हैं।’

विल्करसन लिखते हैं, ‘पॉवेल के 2003 के प्रजेंटेशन से इसकी तुल्यता चकित करने वाली है।’ विल्करसन ने न्यूयॉर्क टाइम्स में किसी का नाम नहीं लिया लेकिन नेशनल प्रेस क्लब में साफ कर दिया कि अमरीका को ईरान से युद्ध की ओर कौन धकेल रहा है? इजरायल के राष्ट्रपति बेंजामिन नेतान्याहू, प्रतिरक्षा मंत्री एविग्डॉरलिबरमैन तथा अमरीका में उनके मुदर्रिस, जिनमें निक्की हेली भी शामिल हैं। ये सभी मानते हैं कि श्रेष्ठ यही होगा कि अमरीकी सेना ईरान सरकार के तख्ता-पलट में हिस्सेदारी करे।’ वे लिखते हैं कि इजरायल, ईरानी सेना का मुकाबला करने में सक्षम हैं। इजरायल के दो सौ परमाणु हथियार, ईरान को हवा में उड़ा देंगे। तो फिर अमरीका को इस टकराव में झोंकने का अर्थ क्या है? यह शुद्ध मौकापरस्ती है।

अपना खून बहाने से अच्छा है कि दोस्त का खून बहाया जाए। तर्क दिया जा सकता है कि विल्करसन ने 2003 में अतिशयोक्तियों को मान लिया था, तो क्या गारंटी है कि वे वही भूल आज नहीं कर रहे। आज का वाइट हाउस पूरी तरह अविश्वसनीय है। अमरीकी राष्ट्रपति की तुलना कलिगुला से करना सही नहीं। यद्यपि लोग यही कह रहे हैं। कलिगुला ने अपने घोड़े को वजीर का दर्जा दे दिया था। ट्रंप ने ऐसा कुछ नहीं किया। पर भविष्य के बारे में कौन जानता है?

ईरान के बारे में वाशिंगटन की नीति पारदर्शी है। अमरीका मध्य-पूर्व में जो क्षेत्रीय व्यवस्था कायम करना चाहता है, उससे ईरान को बाहर रहने दो और उसके विषदंत निकाल लो। चाहे सैनिक कार्रवाई समेत कुछ भी करना पड़े। बराक ओबामा-जॉन केरी ने इस क्षेत्र के लिए जो नक्शा बनाया था यह बिलकुल उलटा है। 2015 में ईरान के साथ हुए परमाणु समझौते का एक वैचारिक फ्रेम था। ओबामा की योजना में एशिया से नजदीकी अहम थी।

चीन के असाधारण उभार की मांग थी कि अमरीका प्रशांत क्षेत्र की तरफ ज्यादा ध्यान दे। परमाणु समझौते से ईरान को जो वैधता मिली, उसके नतीजे में वह वाशिंगटन द्वारा प्रस्तावित प. एशिया के सत्ता संतुलन में महत्वपूर्ण पात्र हो गया। इस योजना में अन्य पात्र मिस्र, इजरायल, सऊदी अरब, टर्की व कतर थे। लेकिन सऊदी अरब और इजरायल, जो सीरिया में साथ-साथ थे, ईरान की इस भूमिका के खिलाफ थे।

दोनों की तब हवा निकल गई जब रूस ने सीरिया के घटनाक्रम को पलट दिया। तभी ट्रंप व्हाइट हाउस में प्रगट हुए, लगभग कलिगुला की तरह। जब वे राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार थे, उन्होंने सीएनएन के जेक टैपर से कहा था कि अरबों डॉलर सीरिया के ग्रुपों को दिए गए हैं जो शायद इस्लामिक स्टेट थे- ‘मेरा खयाल है, वे इस्लामिक स्टेट ही थे।’ संदिग्ध ग्रुपों पर पैसा बर्बाद करने की जगह ट्रंप अब पैसा बनाना चाहते हैं। इसीलिए उन्होंने अमरीकी सैनिकों को सीरिया में उतारा है। अब एक लंबा-चौड़ा बिल सऊदी अरब के होने वाले बादशाह को भेजा जाएगा। थोड़ी-सी सफलता की खोज में क्या निवारक युद्ध की ओर धकेला जाना चाहिए?

ट्रंप ने निर्णायक पदों पर जिनकी नियुक्ति की है, वे अमरीकी राष्ट्रपति के दु:स्साहस को प्रोत्साहित ही करेंगे। युद्धबाज निक्की हेली अपनी राय से हटने वाली नहीं। इस रूट पर जाने से पहले ट्रंप को विल्करसन द्वारा प्रस्तुत इस आंकड़े पर एक नजर डाल लेनी चाहिए। जनमत सर्वेक्षण के अनुसार कम से कम चार अरब लोग सोचते हैं कि हम (अमरीकी) उनकी सुरक्षा के लिए नंबर एक खतरा हैं- ‘हम इराक, लीबिया, अफगानिस्तान और सीरिया कर चुके हैं। अगर हम ईरान पर हमला करते हैं, तो माना जाएगा कि वही सिलसिला जारी है।’ क्या यही अमरीका की स्थायी विरासत होगी?

सौजन्य – पत्रिका।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

संपादकीय:Editorials (English & Hindi) Daily Updated © 2018 Frontier Theme